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वो लड़का जो दिल में बस गया

वो लड़का जो दिल में बस गया


कभी-कभी ज़िन्दगी में कोई ऐसा शख़्स मिल जाता है, जो कुछ कहे बिना ही दिल की हर बात समझ लेता है।
ऐसा ही हुआ आराध्या के साथ, जब उसकी मुलाकात आरव से हुई।


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 पहली मुलाकात

आराध्या एक सीधी-सादी, शर्मीली लड़की थी। कॉलेज की लाइब्रेरी में उसकी दुनिया किताबों और कॉफ़ी के कप के बीच सिमटी थी।
वहीं पहली बार उसने उसे देखा — आरव, जो हमेशा मुस्कुराता रहता था, जैसे ज़िन्दगी की सारी परेशानियाँ उस पर असर ही न करती हों।

उस दिन आराध्या की किताब नीचे गिरी, और आरव ने झुककर उठाई।
“तुम्हारी पसंद अच्छी है,” उसने कहा — किताब थी Ghalib’s Poetry Collection।
बस, उसी पल कुछ तो हुआ था — जो दिल में कहीं गहराई तक उतर गया।


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🌧️ अनकहे एहसास

दिन बीतते गए, और हर मुलाकात उनके बीच एक नया रिश्ता बुनने लगी।
कभी लाइब्रेरी में किताबों के बहाने बात होती, कभी कैंटीन में चाय के दो कप साझा हो जाते।
आरव का हँसना, उसका बातों में खो जाना, और वो छोटी-छोटी केयर — सब कुछ जैसे आराध्या की दुनिया बन गया था।

पर उसने कभी कहा नहीं।
क्योंकि उसे डर था कि अगर उसने अपने दिल की बात कह दी, तो शायद वो रिश्ता हमेशा के लिए बदल जाए।


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🌹 इज़हार का दिन

एक दिन कॉलेज की फेयरवेल पार्टी थी। सब हँस रहे थे, नाच रहे थे।
आराध्या के दिल में तूफ़ान चल रहा था — क्या आज बोल दूँ?
वो आरव के पास गई, काँपते हाथों से कहा —
“आरव, अगर मैं कहूँ कि तुम मेरी ज़िन्दगी की सबसे ख़ूबसूरत गलती हो... तो क्या तुम नाराज़ होगे?”

आरव ने हँसकर कहा —
“गलती नहीं आराध्या, शायद किस्मत हूँ मैं।”

वो पल जैसे रुक गया था।
आरव ने उसका हाथ थामा — और पहली बार, सब कुछ कह दिया, बिना एक भी शब्द बोले।


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💌 जुदाई का मौसम

लेकिन ज़िन्दगी हमेशा आसान नहीं होती।
कॉलेज ख़त्म हुआ, और आरव को अपने करियर के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा।
वो रात जब उसने विदा ली, आराध्या की आँखों में आँसू थे।
आरव ने बस इतना कहा —
“मैं लौटूँगा, लेकिन अगर न भी आया... तो याद रखना, मैं तुम्हारे दिल में रहूँगा।”

आराध्या ने बस सिर झुका लिया, जैसे दिल ने हमेशा को स्वीकार कर लिया।


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🕰️ सालों बाद...

तीन साल बाद, आराध्या अब एक स्कूल में टीचर थी।
वो अब भी हर सुबह वही कॉफ़ी पीती, वही ग़ालिब की किताब पढ़ती।
पर आज कुछ अलग था —
दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसने खोला...
सामने आरव था — वही मुस्कुराहट, वही आँखें।

“माफ़ करना आराध्या,” उसने कहा, “ज़िन्दगी में बहुत कुछ पीछे छूट गया, लेकिन तुम नहीं।”
आराध्या की आँखों में आँसू थे —
“तुम्हारे बिना मैं अधूरी थी, लेकिन तुम्हारी यादों से कभी खाली नहीं हुई।”


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💖 दिल की बात

आरव ने उसका हाथ थामा और कहा —
“पता है, जब भी मुश्किल वक्त आया, मैं तुम्हारी मुस्कान याद करता था।
तुम्हारी आँखों में जो भरोसा था, वो मुझे ज़िन्दा रखता था।”

आराध्या बस मुस्कुरा दी —
“और मैं हर रात ये सोचकर सो जाती थी कि कहीं न कहीं, तुम भी मुझे याद करते होगे।”

दोनों के बीच कुछ पल की ख़ामोशी थी, मगर उस ख़ामोशी में ही सब कुछ था —
मोहब्बत, दर्द, और एक नयी शुरुआत।


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🌷 नई शुरुआत

अब दोनों साथ थे — वही शहर, वही कॉफ़ी, वही पुरानी ग़ालिब की किताब।
बस फर्क इतना था कि अब हर शेर में उनका नाम था, हर पन्ने पर उनकी कहानी।

आराध्या ने कहा —
“कभी-कभी लगता है, ज़िन्दगी हमें घुमाकर वहीं लाती है, जहाँ से हमने छोड़ा था।”
आरव मुस्कुराया —
“क्योंकि कुछ लोग ज़िन्दगी से नहीं, दिल से जुड़े होते हैं।”


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💫 अंत या शुरुआत?

शाम ढल रही थी, दोनों एक बेंच पर बैठे थे।
हवा में कॉफ़ी की खुशबू थी और दिल में वही पुराना एहसास।
आरव ने हल्के से कहा —
“शुक्रिया, मुझे अपने दिल में जगह देने के लिए।”

आराध्या बोली —
“तुम जगह नहीं आरव... अब मेरी धड़कन बन चुके हो।”

आसमान में तारे चमक रहे थे, और नीचे दो दिल —
जो सालों पहले बिछड़े थे, आज फिर एक हो गए।

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